बागी बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का दर्द छलका

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TIO भोपाल

मध्यप्रदेश में सियासी ड्रामे के बाद बयानबाजी का दौरा तेजी से चल रहा है। जहां फ्लोर टेस्ट में फेल होने के बाद बीजेपी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। हाईकमान ने पार्टी संगठन की बड़ी बैठकें बुलाने के निर्देश दे दिए हैं। वही बागी होकर कांग्रेस को समर्थन देने वाले बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का दर्द एक बार फिर छलक आया है। उन्होंने खुलासा किया है कि 2018 का चुनाव लड़ा तो मुझे शिवराज की घोषणाओं का बोझ झेलना पड़ा। शिवराज जी ने मेरे क्षेत्र में कई योजनाओं की घोषणा कीं जो पूरी नहीं की गयीं, मैने सब जगह गुहार लगाई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।त्रिपाठी के इस खुलासे के बाद भाजपा मे फिर हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर शिवराज सीधे तौर पर हाईकमान के निशाने पर आ गए है।

दरअसल, वोटिंग के बाद बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी का दर्द छलका है। उन्होंने यह कदम क्यों उठाया इसका उन्होंने खुलासा किया है। त्रिपाठी का कहना है कि मैंने पहले इस बात के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा, मैंने 15 दिन पहले ही ट्वीट करके तैयार रहने के लिए कहा था, मेरे लिए सबसे पहले मान सम्मान स्वाभिमान जरूरी है, लेकिन बीजेपी में मेरा सम्मान नहीं था। बीजेपी ने मेरी कद्र नहीं की, मैं वही करता हूं जो मेरी मर्ज़ी होती है। सरकार गिराना मुझे अच्छा नहीं लगता।

त्रिपाठी ने आगे कहा कि शिवराज जी ने मेरे क्षेत्र में कई योजनाओं की घोषणा कीं जो पूरी नहीं की गयीं, इस वजह से वे जनता के रोष का कारण बन रहे थे। मैने सब जगह गुहार लगाई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 2018 का चुनाव लड़ा तो मुझे शिवराज की घोषणाओं का बोझ झेलना पड़ा। कमलनाथ जी से मेरे पुराने रिश्ते हैं. उनसे हमेशा मुलाकात होती रहती है, अभी मैहर के विकास के लिए ही उनसे बात हुई थी। मैं कुछ दिन पहले शिवराज जी से भी मिला था लेकिन मेरी बात को किसी ने नहीं सुना। बीजेपी में जहां तिलक लगाकर बुलाया जाता है बाद में बकरे की तरह हलाल कर दिया जाता है।

सुत्रों की माने तो लोकसभा के बाद से ही त्रिपाठी सरकार के संपर्क में चल रहे थे। वही उनकी सतना के सांसद गणेश सिंह से उनकी लंबे समय से अनबन चल रही थी। चूंकि संगठन खुलकर गणेश सिंह के साथ था, इस बात से नारायण त्रिपाठी दुखी चल रहे थे। हालांकि उन्होंने भाजपा के खिलाफ जाने का ठीकरा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सिर फोड़ा है।वही विधानसभा में संख्या बल जुटाने में लगी कमलनाथ सरकार भी त्रिपाठी को इसके लिए पूरी छूट देने के संकेत दे रही है।