भोपाल। मध्यप्रदेश में चल रहा लोकतंत्र का महापर्व अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच चुका है। 100 से अधिक दलों के 2907 प्रत्याशियों के सियासी भाग्य का पिटारा कल खुलेगा और इसी चरण में ईवीएम से नई सरकार निकलेगी। इसी चुनाव के जरिये दिग्गजों ने अपनी विरासत वारिसों को सौंपने की तैयारी की है। पर सियासत के ये नये वारिस कितना असरदार साबित होते हैं। ये तो नतीजे ही तय करेंगे।
The fate of 2907 candidates, will be seen on the winners of veterans tomorrow.
हालांकि, राजनीति में वंशवाद की परंपरा कोई नई बात नहीं है, पार्टी कोई भी हो, वंशवाद की बीमारी से बच नहीं पायी है। बीजेपी-कांग्रेस ने इस बार एक दर्जन से भी ज्यादा नेताओं के परिजनों को टिकट दिया है। दोनों पार्टियों ने नेताओं के पुत्र-पुत्री, बहू-भाई, भतीजे सबको उम्मीदवार बनाया है।
बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर
बीजेपी ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की जगह उनकी बहू कृष्णा गौर को राजधानी भोपाल की गोविंदपुरा सीट से मैदान में उतारा है। ऐसे में दस बार से लगातार विधानसभा चुनाव जीतने वाले बाबूलाल गौर की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी है।
कैलाश के बेटे आकाश विजयवर्गीय
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश भी इस बार इंदौर-3 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। आकाश को टिकट दिये जाने की वजह से बीजेपी ने इंदौर की सभी सीटों पर नामांकन के आखिरी दौर में टिकटों की घोषणा की थी। इस सीट पर आकाश के साथ-साथ कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है क्योंकि पार्टी ने कैलाश का टिकट काटकर आकाश पर दांव लगाया है।
गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार
वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने भी इस बार टिकट की दावेदारी छोड़ दी और बेटे मुदित के लिए टिकट मांगा। जिसे बीजेपी ने स्वीकार कर लिया। मुदित परंपरागत सांची सीट से चुनाव मैदान में हैं, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभुराम चौधरी से है।
हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह
सतना जिले की रामपुर-बघेलान सीट से विधायक और मंत्री हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह को भी बीजेपी ने इस बार टिकट दिया है। रामपुर-बघेलान सीट बीजेपी की मजबूत सीटों में से एक है।
सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटे सुधीर यादव
सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटे सुधीर यादव इस बार सागर जिले की हाईप्रोफाइल सीट सुरखी से चुनाव मैदान में हैं। यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के कद्दावर नेता गोविंद सिंह राजपूत से है। पिछली बार बीजेपी प्रत्याशी पारूल साहू महज 141 वोटों से चुनावी जीती थीं। जो जीत के अंतर का सबसे छोटा आंकड़ा था।
पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा
सूबे के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को भी बीजेपी ने विदिशा जिले की सिरोंज सीट से प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में इस बार देखना दिलचस्प होगा कि सिरोंज का मतदाता किसा पर भरोसा जताता है।
प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हुए पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी भी उज्जैन जिले की घट्टिया सीट से चुनाव मैदान में हैं। अजीत 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर आलोट सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें उन्हें हार मिली थी।
दिग्विजय सिंह के परिवार से तीन उम्मीदवार
प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के परिवार से भी इस बार तीन लोग चुनाव लड़ रहे हैं। दिग्गी के बेटे जयवर्धन सिंह जहां परंपरागत सीट राघौगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं तो भाई लक्ष्मण सिंह चांचौड़ा सीट से मैदान में हैं, जबकि उनके भतीजे प्रियव्रत सिंह राजगढ़ जिले की खिलचीपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं।
कांतिलाल भूरिया का बेटा-भतीजी लड़ रहे चुनाव
कांग्रेस सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया और भतीजी कलावती भूरिया भी इस बार चुनाव मैदान में हैं। विक्रांत जहां झाबुआ सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं तो उनकी बहन कलावती अलीराजपुर जिले की जोबट सीट से मैदान में हैं।
चुनावी अखाडे़ में सुभाष यादव के दोनों बेटे
पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के दोनों बेटे अरुण यादव और सचिन यादव भी इस बार चुनाव मैदान में हैं। अरुण यादव सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट से सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं तो उनके भाई सचिन पिता की परंपरागत सीट कसरावद से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में इन सभी नेताओं के परिजनों के सियासी भाग्य का फैसला भी मतदाता ईवीएम में कैद कर चुके हैं। अब 11 दिसंबर को ईवीएम से नई सरकार के साथ ही इनके भी सियासी भाग्य पर मुहर लगेगी।

